पंजाब के खौफ की मेरठ में दस्तक, आखिर क्यों रूके थे पंजाब के हिस्ट्रीशीटर? एक का कनेक्शन आईएसआई से

मेरठः यहां की पॉश कालोनी में महीनों से डेरा जमाये रह रहे पंजाब के तीन बड़े अपराधियों में से दो की पुलिस ने शिनाख्त कर ली है। पुलिस को ऑटोमेटिक गन दिखाकर भागे अपराधियों में दो पंजाब के शातिर हिस्ट्रीशीटर क्रिमिनल है। चार राज्यों में कुख्यात आईएसआई से कनेक्ट जयपाल भुल्लर गैंग के शार्प शूटर भी है। मेरठ में गुरुवार को किराये की कोठी में रह रहे इन अपराधियों का वेरीफिकेशन के वक्त पिकेट के सिपाहियों से सामना हो गया था और ये बदमाश सिपाहियों की छाती पर बंदूक तानकर फरार हो गये।

पंजाब के कपूरथला जिले के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर अमरवीर और हरजोत करीब एक महीने से मेरठ की पॉश कालोनी यशोदा कुंज की एक कोठी में डेरा डाले हुए थे। ये कोठी हस्तिनापुर के एक कनैक्शन से इन बदमाशों को किराये पर मिली थी। इनके साथ एक तीसरा बदमाश भी था जिसकी शिनाख्त फिलहाल नहीं हो पायी है। पुलिस ने इन बदमाशों के हस्तिनापुर कनैक्शन हरप्रीत को दबोचने की कोशिश भी की, लेकिन दबिश से पहले ही वह अपने पूरे कुनबे के साथ घर में ताला डालकर फरार हो गया। 

पुलिस ने हरप्रीत के भाई को हिरासत में लिया है और इन बदमाशों का कच्चा चिठ्ठा पता कर रही है। मौके से बरामद पंजाब नंबर की एक कार के रजिस्ट्रेशन डिटेल से पुलिस ने ये पता लगा लिया है कि यह कार कपूरथला के रूपेन्द्र सिंह की थी और उसी के दोनों हिस्ट्रीशीटर बेटे मेरठ की इस कोठी में रह रहे थे। 

पुलिस सूत्रों के मुताबिक अमरवीर और हरजोत पंजाब के कुख्यात गैंगस्टर जयपाल भुल्लर के गिरोह के शार्प शुटर है। इस गैंग का काम रंगदारी और बड़ी लूटों के अलावा करोड़ों रुपये की सुपारी किलिंग करना है। बताया जाता है कि जयपाल का कनैक्शन आईएसआई से भी है। जयपाल भुल्लर की राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और यूपी की पुलिस को तलाश है। 26 जनवरी को पंजाब में भुल्लर गैंग के तीन बड़े बदमाशों को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर किया था। माना जा रहा है कि पुलिस से बचने के लिए अमरवीर और हरजोत ने मेरठ में अपना डेरा जमा रखा था। पुलिस को शक है कि दोनो हिस्ट्रीशीटरों ने किसी बड़ी वारदात का तानाबाना भी मेरठ में रहकर बुना हो। इसलिए एसएसपी मंजिल सैनी ने स्थानीय खुफिया सेल को इन बदमाशों की कुंडली और करनी का चिठ्ठा तलाशने की जिम्मेवारी दी है। 

यहाँ रह रहे दोनो हिस्ट्रीशीटर पड़ौसियों को बताते थे कि वह जिम ट्रेनर है। लेकिन उनकी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना जब पुलिस तक पहुँची तो गंगानगर थानेदार ने मामले की गंभीरता जाने बगैर फौरी तौर पर दो सिपाहियों को वेरीफिकेशन के लिए भेज दिया। अगर थानेदार ने संजीदगी दिखाई होती तो बदमाश पकड़े जा सकते थे और उनके बुने हुए जाल में क्या छुपा है इसका भी पता चल सकता था।